प्रिंसिपल के डेस्क से...

सी.एस.आई.आर.- सी.एस.आई.ओ. के आई.एस.टी.सी. नाम से लोकप्रिय इंडो-स्विस प्रशिक्षण केंद् की स्थापना 18 दिसंबर वर्ष 1963 में स्विस फाउंडेशन के सहयोग से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री स्वर्गीय पंडित जवाहर लाल नेहरू ने की थी। अपनी स्थापना के बाद इस केंद् ने अपना रास्ता स्वयं तय किया है और अपनी उपस्थिति क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर महसूस की है । केन्द्र अंतःविषयों कार्यक्रमों में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में वैश्विक प्रवृत्तियों को प्राप्त करने की धुन में है।

प्रशिक्षण की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए कार्यप्रदर्शन के मूल्यांकन की एक सुदढ़ अभ्यास उन्मुख प्रशिक्षण में आईएसतीसी की अनोखी पद्धति नवीनतम प्रौद्योगिकी के साथ काम कर रही है जिसमें आई.एस.टी.सी. नए विचारों और नवाचार के साथ सीख रहा है। इस प्रक्रिया में सटीकता, परिशुद्धता, जिम्मेदारी से सही काम करना, सहक्रिया और नेतृत्व के गुणों की भावना पर जोर दिया जाता है।

प्रत्येक वर्ष इस केंद्र में खेल आयोजन,रक्तदान शिविर, अन्य सह पाठ्यक्रम गतिविधियाँ, एन.सी.सी आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाते है जिसमें आईएसटीशियन को समय की पाबंदी प्रतिबद्धता और ईमानदारी, टीम वर्क, श्रम वर्क आदि गुण आत्मसात करवाए जाते है।

मुझे इस केंद्र के पूर्व उत्कृष्ट छात्रों में गर्व हैं जिन्होने उद्यमियों के रूप में न केवल भारत में अपितु दूसरे देशों में भी विनिर्माण इकाइयों की स्थापना की है जिसके कारण दूसरों के लिए भी संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनेडा, चीन, सिंगापुर आदि स्थलों में भी काम करने का रास्ता खुल गया है ।
मुझे विश्वास है कि सी.एस.आई.आर. –आई.एस.टी.सी. वर्ल्ड क्लास इंजीनियरों राष्ट्र प्रगति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे । आगे प्रगति और उत्पादन के विकास कार्यक्रमों में इस तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए एक मॉडल बनने के लिए क्रियाशील रहेंगें ।

आई.एस.टी.सी. (सी.एस.आई.आर.- सी.एस.आई.ओ.) का भाग है ।



आर.सी. अग्निहोत्री
प्रधानाचार्य, आई.एस.टी.सी.